नौकरी सरकारी !!!
मरकर पहुंचा
इन्द्र के दरबार,
जीवन के उसके
थे कुछ पुण्य
पाप भी किये थे
उसने कई बार!
पुण्यों का देने फल
यमराज ने उसे
पहले पांच साल हेतु स्वर्ग
भिजवाया
लेकिन पांच दिन बाद ही
उसका सन्देश आया-
‘हे! यमराज,
नहीं चाहिए मुझे स्वर्ग की
सुविधाए
मुझे तो आप कहीं और ही
भिजवायें.’
सोचा यमराज ने
‘बड़ा विचित्र मनुष्य है
स्वर्ग ठुकरा रहा है
यह तो धर्मराज युधिष्ठिर से
भी
दो कदम आगे जा रहा है!’
खुश हुए यमराज
दे दिया वरदान
कुछ भी मांग लो तुम
हे मनुष्य महान.’
बोला मनुष्य रूककर
थोडा सा झुककर
‘स्वर्ग में तो है पाबन्दी
काम ही काम
बिना ‘कुछ’ लिए ही
लेना पड़ता है प्रभु का नाम
दिया है आपने वरदान
मांगने की मेरी बारी
भिजवायें मुझे पृथ्वी पर
और दिलवाएं ‘नौकरी सरकारी’.”





