शुक्रवार, 17 मई 2013




क्या करेगी मेनका!!!

इंद्र के दरबार से एक दिन
मेनका आई
देखकर मुझे
वो मुस्कराई
मैंने पूछा -
सुन ओ मेनका रानी!
किसकी शामत है आई
जो पड़ी है इस धरती पर
तेरी परछाई
करते हुए ठिठोली
मेनका बोली
इस बार तेरा ही नंबर आया है
इंद्र देव ने मुझे
तेरे लिए ही भिजवाया है
पर तुझे देखकर तो लगता है ऐसा
कि यह मेरे हुश्न का अपमान है,
मैं हूँ राज भोज तो तू
गंगू तेली समान है.
फिर तरह तरह से मेनका
केबरे करने लगी
देखकर उसको दिशाएँ
आहे भरने लगी
पर मैं नही रीझा
ना ही मेरा दिल पसीजा
आखिर मेनका हार गई
पुनः स्वर्ग सिधार गई
पर जाते जाते बोली
हे मानव!
तपस्या कैसी है यह तेरी
जो मेहनत व्यर्थ हो गई
सारी की सारी  मेरी
हमने कहा-
सुन ओ मेनका रानी
वो विश्वामित्र तो करता था तपस्या
इन्द्रासन के लिए
इसलिए बेचारा फंस गया
और तेरा जादू  गया
पर यहाँ तो हम करते है तप  कठोर
ताकी दिन भर के मेहनत के बाद
मुंह में चले जाए रोटी के कुछ कौर
इसलिए तू तो क्या
तेरे जैसी कई मेनकाएँ आएगी और जाएगी
पर हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पायेगी।